Skip to main content

Posts

Showing posts from June, 2022

भारतीय संस्कृति के संस्मरण सुमन*

  *समझदार बहू* शाम को गरमी थोड़ी थमी तो मैं पड़ोस में जाकर निशा के पास बैठ गई। उसकी सासू माँ कई दिनों से बीमार है। सोचा ख़बर भी ले आऊँ और बैठ भी आऊँ। मेरे बैठे-बैठे उसकी तीनों देवरानियाँ भी आ गईं। "अम्मा जी, कैसी हैं?" शिष्टाचारवश पूछ कर इतमीनान से चाय-पानी पीने लगी। फिर एक-एक करके अम्माजी की बातें होने लगी। सिर्फ़ शिकायतें, जब मैं आई तो अम्माजी ने ऐसा कहा, वैसा कहा, ये किया, वो किया। आधा घंटे बाद सब यह कहकर चली गईं कि उन्होंने शाम का खाना बनाना है। बच्चे इन्तज़ार कर रहे हैं। कोई भी अम्माजी के कमरे तक भी न गया। उनके जाने के बाद मैं निशा से पूछ बैठी, निशा अम्माजी, आज एक साल से बीमार हैं और तेरे ही पास हैं। तेरे मन में नहीं आता कि कोई और भी रखे या इनका काम करे, माँ तो सबकी है। उसका उत्तर सुनकर मैं तो जड़-सी हो गई। वह बोली, "बहनजी, मेरी सास सात बच्चों की माँ है। अपने बच्चो को पालने में उनको अच्छी जिंदगी देने में कभी भी अपने सुख की परवाह नही की सबकी अच्छी तरह से परवरिश की। ये जो आप देख रही हैं न मेरा घर, पति, बेटा, शानो-शौकत सब मेरी सासुजी की ही देन है। अपनी-अपनी स...

भारतीय संस्कृति के संस्मरण सुमन*

  *समझदार बहू* शाम को गरमी थोड़ी थमी तो मैं पड़ोस में जाकर निशा के पास बैठ गई। उसकी सासू माँ कई दिनों से बीमार है। सोचा ख़बर भी ले आऊँ और बैठ भी आऊँ। मेरे बैठे-बैठे उसकी तीनों देवरानियाँ भी आ गईं। "अम्मा जी, कैसी हैं?" शिष्टाचारवश पूछ कर इतमीनान से चाय-पानी पीने लगी। फिर एक-एक करके अम्माजी की बातें होने लगी। सिर्फ़ शिकायतें, जब मैं आई तो अम्माजी ने ऐसा कहा, वैसा कहा, ये किया, वो किया। आधा घंटे बाद सब यह कहकर चली गईं कि उन्होंने शाम का खाना बनाना है। बच्चे इन्तज़ार कर रहे हैं। कोई भी अम्माजी के कमरे तक भी न गया। उनके जाने के बाद मैं निशा से पूछ बैठी, निशा अम्माजी, आज एक साल से बीमार हैं और तेरे ही पास हैं। तेरे मन में नहीं आता कि कोई और भी रखे या इनका काम करे, माँ तो सबकी है। उसका उत्तर सुनकर मैं तो जड़-सी हो गई। वह बोली, "बहनजी, मेरी सास सात बच्चों की माँ है। अपने बच्चो को पालने में उनको अच्छी जिंदगी देने में कभी भी अपने सुख की परवाह नही की सबकी अच्छी तरह से परवरिश की। ये जो आप देख रही हैं न मेरा घर, पति, बेटा, शानो-शौकत सब मेरी सासुजी की ही देन है। अपनी-अपनी स...

*जंबू वन*

  *जंबू वन* एक था जंगल! बेहद घना ! इतना घना कि सूरज की किरणों को धरती चूमने में मशक्कत करनी पड़ती थी। भला ऐसी कौन सी प्रजाति थी जिसके पेड़ और पौधे वहां नहीं हो!! बरगद, पीपल, नीम, देवदार , अर्जुन जैसे छायादार पैडों से लेकर जामुन, आम, शहतूत, अमरूद, कटहल आदि फलदार पेड़ वहां लगे थे। इन पेड़ों की छाया में फूलों के पौधे भी पनपते थे। और तो और देसी बबूल भी बहुतायत में थे। जामुन के पेड़ों की बहुतायत के कारण इस जंगल को जंबूवन कहा जाता था। भिन्न भिन्न प्रजाति के बावजूद इन पेड़ों में कभी आपस में संघर्ष नहीं हुआ। अगर दो पेड़ों की शाखाएं आपस में टकरा भी जाती तो विचार विमर्श कर रास्ता निकाल लिया जाता। आसपास के जंगलों का भी यही हाल था। परस्पर सह अस्तित्व की अवधारणा के आधार पर ही यह जंगल सदियों से टिके हुए थे। और फिर इतिहास ने करवट ली। दूर रेगिस्तान में एक नवीन प्रजाति का जन्म हुआ। यह प्रजाति बबूल के पेड़ से ही जन्मी थी, लेकिन इसकी ऊंचाई ज्यादा नहीं थी । कांटे और पत्ते जहरीले थे, जिन्हें कोई भी जानवर खाना पसंद नहीं करता था। यह प्रजाति नीचे ही नीचे बढ़ती थी और बाकी पौधों और पेड़ों को लील ...

हरि इच्छा बल्वान

हरि इच्छा  . एक बार भगवान विष्णु गरुड़जी पर सवार होकर कैलाश पर्वत पर जा रहे थे। रास्ते में गरुड़जी ने देखा कि एक ही दरवाजे पर दो बाराते ठहरी थी। . मामला उनके समझ में नहीं आया। फिर क्या था, पूछ बैठे प्रभु को। . गरुड़जी बोले ! प्रभु ये कैसी अनोखी बात है कि विवाह के लिए कन्या एक और दो बारातें आई है। मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ रहा है। . प्रभु बोले- हां एक ही कन्या से विवाह के लिए दो अलग अलग जगह से बारातें आई है। एक बारात पिता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है, और दूसरी माता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है। . यह सुनकर गरुड़जी बोले- आखिर विवाह किसके साथ होगा ? . प्रभु बोले- जिसे माता ने पसंद किया और बुलाया है उसी के साथ कन्या का विवाह होगा। . भगवान की बाते सुनकर गरुड़जी चुप हो गए और भगवान को कैलाश पर पहुंचाकर कौतुहल वश पुनः उसी जगह आ गए जहां दोनों बारातें ठहरी थी। . गरुड़जी ने मन में विचार किया कि यदि मैं माता के बुलाए गए वर को यहां से हटा दूं तो कैसे विवाह संभव होगा। . फिर क्या था; उन्होंने भगवद्विधान को देखने की जिज्ञासा के लिए तुरन्त ही उस वर को उठाया और ले जाकर समुद्र के एक टापू पर ध...

The Vedic Mathematics in the Dwarka Archaeology of Lord Krishna:

 भगवान कृष्ण की द्वारका का वैदिक-गणित: The Vedic Mathematics in the Dwarka Archaeology of Bhagwan Krishna: अब्राहम सिडेनबर्ग जैसे विद्वान २०० वर्षों में एक बार पैदा होते हैं। अब्राहम सिडेनबर्ग हार्वर्ड विश्वविद्यालय में "गणित-इतिहास" के सम्मानित प्रोफ़ेसर थे। १९७८ में इनकी प्रकाशित शोध पत्र: "दी ओरिजिन ऑफ़ मैथमेटिक्स" (The Origin of Mathematics) ने धूम मचा दी। सिडेनबर्ग कहते थे, यूनान का गणित, भारत से आयातित हैं, जो कम से कम ५००० वर्ष पुरानी है। मृत्यू पर्यन्त वैदिक गणित की प्राचीनता का उत्तर सिडेनबर्ग साहब को नहीं मिला। अतृप्त इच्छा लिए, १९८८ में मिलान नगर, इटली में इनकी मृत्यू हो गई। अब्राहम सिडेनबर्ग सही थे। भगवान कृष्ण की द्वारका में वैदिक गणित के प्राचीन पुरातात्विक अवशेष मिलते हैं। "शूल्व- सूत्र" वैदिक गणित का आधार है। "शूल्व- सूत्र" में रज्जू यन्त्र का प्रयोग किया जाता था। जिनके माध्यम से बहुत सारे ज्यामिति तथा वास्तु निर्माण के डिजाइन बनाये जाते थे। "शूल्व- सूत्र", जिसमें बौधायन का "शूल्व- सूत्र" प्रमुख हैं, का जन्म, द्व...

पितापुत्रकाअनोखारिश्ता

 पितापुत्रकाअनोखारिश्ता  ——————————————— भारतीय पिता पुत्र की जोड़ी भी बड़ी कमाल की जोड़ी होती है। दुनियां के किसी भी सम्बन्ध में, अगर सबसे कम बोल-चाल है, तो वो है पिता-पुत्र की जोड़ी में.... एक समय तक दोनों अंजान होते हैं, एक दूसरे के बढ़ते शरीरों की उम्र से फिर धीरे से अहसास होता है हमेशा के लिए बिछड़ने का...! जब लड़का, अपनी जवानी पार कर अगले पड़ाव पर चढ़ता है तो यहाँ इशारों से बाते होने लगती हैं  या फिर इनके बीच मध्यस्थ का दायित्व निभाने वाली माँ के माध्यम से...! पिता अक्सर उसकी माँ से कहा करते हैं — "उससे कह देना।" और.... पुत्र अक्सर अपनी माँ से कहा करता है — "पापा से पूछ लो ना।" इसी दोनों धुरियों के बीच घूमती रहती है — माँ।  जब एक कहीं होता है तो दूसरा वहाँ नहीं होने की कोशिश करता है, शायद पिता-पुत्र नजदीकी से डरते हैं। जबकि.... वो डर नजदीकी का नहीं है, डर है उसके बाद बिछड़ने का ।  भारतीय पिता ने शायद ही किसी बेटे को कहा हो कि बेटा मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ। पिता की अनंत गालियों का उत्तराधिकारी भी वही होता है, क्योंकि पिता हर पल जिन्दगी में अपने बेटे को अभिमन्...

एक पंडितजी थे वो श्रीबांके बिहारी लाल को बहुत मानते थे सुबह-शाम बस ठाकुरजी ठाकुरजी करके व्यतीत होता

  एक पंडितजी थे वो श्रीबांके बिहारी लाल को बहुत मानते थे सुबह-शाम बस ठाकुरजी ठाकुरजी करके व्यतीत होता ... पारिवारिक समस्या के कारण उन्हें धन की आवश्यकता हुई ...तो पंडित जी सेठ जी के पास धन मांगने गये ...सेठ जी धन दे तो दिया पर उस धन को लौटाने की बारह किस्त बांध दी ...पंडितजी को कोई एतराज ना हुआ ...उन्होंने स्वीकृति प्रदान कर दी अब धीरे-धीरे पंडितजी ने ११ किस्त भर दीं एक किस्त ना भर सक । इस पर सेठ जी १२ वीं किस्त के समय निकल जाने पर पूरे धन का मुकद्दमा पंडितजी पर लगा दिया कोर्ट-कचहरी हो गयी जज साहब बोले पंडितजी तुम्हारी तरफ से कौन गवाही देगा ....इस पर पंडितजी बोले की मेरे ठाकुर बांकेबिहारी लाल जी गवाही देंगे ...पूरा कोर्ट ठहाकों से भर गया ...अब गवाही की तारीख तय हो गयी पंडितजी ने अपनी अर्जी ठाकुरजी के श्रीचरणों में लिखकर रख दी अब गवाही का दिन आया कोर्ट सजा हुआ था वकील, जज अपनी दलीलें पेश कर रहे थे पंडित को ठाकुर पर भरोसा था .जज ने कहा पंडित अपने गवाह को बुलाओ पंडित ने ठाकुर जी के चरणों का ध्यान लगाया तभी वहाँ एक वृद्व आया जिसके चेहरे पर मनोरम तेज था उसने आते ही गवाही पंडितजी के पक्...

*आज की कहानी*

*आज की कहानी* एक बार एक बुजुर्ग दरिया के किनारे पर जा रहे थे। चलते चलते उन्होंने एक जगह देखा कि दरिया की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के किनारे पर आ गया। उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने दरिया के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने तैरना शुरू कर दिया। वह बुजुर्ग बड़े हैरान हुए। उन्होंने उस कछुए का पीछा करने की ठान ली। इसलिए दरिया में तैर कर उस कछुए का पीछा किया। वह कछुआ दरिया के दूसरे किनारे पर जाकर रूक गया और बिच्छू उस की पीठ से छलांग लगाकर दूसरे किनारे पर उतर गया और आगे चलना शरू कर दिया। वह बुजुर्ग भी उसके पीछे चलते रहे। आगे जाकर देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था। उसके रास्ते में एक मालिक का नेक बन्दा बड़े ध्यान में आँखे बन्द कर मालिक की याद में लगा हुआ था। उस बुजुर्ग ने सोचा कि अगर यह बिच्छू उस नौजवान को काटना चाहेगा, तो मैं करीब पहुंचने से पहले ही उसे अपनी लाठी से मार डालूंगा। लेकिन वह चंद कदम आगे बढे ही थे कि उन्होंने देखा दूसरी तरफ से एक काला जहरीला साँप तेजी से उस नौजवान को डसने के लिए आगे बढ़ रहा था। इतने में बिच्छू भी वहां पहुंच गया। उस बिच्छू ने ऐन उ...

शास्त्र कहते हैं कि अठारह दिनों के महाभारत युद्ध में उस समय की पुरुष जनसंख्या का 80% सफाया हो गया था !

 शास्त्र कहते हैं कि अठारह दिनों के महाभारत युद्ध में उस समय की पुरुष जनसंख्या का 80% सफाया हो गया था। युद्ध के अंत में, संजय कुरुक्षेत्र के उस स्थान पर गए जहां संसार का सबसे महानतम युद्ध हुआ था। उसने इधर-उधर देखा और सोचने लगा कि क्या वास्तव में यहीं युद्ध हुआ था? यदि यहां युद्ध हुआ था तो जहां वो खड़ा है, वहां की जमीन रक्त से सराबोर होनी चाहिए। क्या वो आज उसी जगह पर खड़ा है जहां महान पांडव और कृष्ण खड़े थे? तभी एक वृद्ध व्यक्ति ने वहां आकर धीमे और शांत स्वर में कहा, "आप उस बारे में सच्चाई कभी नहीं जान पाएंगे!" संजय ने धूल के बड़े से गबार के बीच दिखाई देने वाले भगवा वस्त्रधारी एक वृद्ध व्यक्ति को देखने के लिए उस ओर सिर को घुमाया। "मुझे पता है कि आप कुरुक्षेत्र युद्ध के बारे में पता लगाने के लिए यहां हैं, लेकिन आप उस युद्ध के बारे में तब तक नहीं जान सकते, जब तक आप ये नहीं जान लेते हैं कि असली युद्ध है क्या?" बूढ़े आदमी ने रहस्यमय ढंग से कहा। "तुम महाभारत का क्या अर्थ जानते हो?" तब संजय ने उस रहस्यमय व्यक्ति से पूछा। वह कहने लगा, "महाभारत एक महाकाव्य है,...

कालगणना

 कालगणना मित्रों आज मैं आपको मनुष्यों के समयसीमा और देवताओं के समयसीमा में अंतर बताने का प्रयास करूंगा। हालांकि इसका मेरे पास कोई शास्त्र प्रमाण नहीं है परन्तु शास्त्रों में वर्णित समय व हमारे द्वारा बोले गए संकल्प का आधार लेकर ही  प्रयास किया है। घंटा मिनट वैज्ञानिक समय है, इसलिए मैं इसी से शुरुआत करूँगा। जैसा कि आप जानते हैं, 60 सेकेंड का 1 मिनिट, 60 मिनिट का 1 घंटा होता है दिन और रात्रि को 24 घंटे में बांटा गया है। 3 घंटे का 1 प्रहर होता है इसलिए 4 प्रहर रात्रि के और 4 प्रहर दिन के होते हैं। 7 दिन को सप्ताह और 15 दिन को पक्ष बताया गया है। दो पक्ष का 1 माह और 12 माह का 1 वर्ष होता है। 360 वर्ष का 1 दिव्यवर्ष यानी देवताओं का एक वर्ष होता है।  जिस प्रकार 30 दिन को महीना कहते हैं 12 महीने को वर्ष कहते हैं उसी प्रकार 432000 वर्ष को कलियुग कहा गया। दो कलियुग मिलकर 1 द्वापरयुग होता है अर्थात द्वापर 864000 वर्ष का होता है। इसी प्रकार से 17280000 वर्ष का त्रेता युग और 3456000 वर्ष का सतयुग होता है। कलियुग में मनुष्य की आयु प्रमाण 100 वर्ष और कद 7 फुट की होती है। द्वापरयुग में म...